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पाठ्यक्रम का दबाव और स्कूल बैग का भार कम करने के लिए सरकार ने उठाए महत्वपूर्ण कदम

     ✍  अतिश दीपंकर  Chief Editor

सरकार ने पाठ्यक्रम के दबाव और स्कूल बैग के भार को कम करने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम निम्नलिखित हैं:

  1. राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने वर्ग 1 और 2 के लिए सिर्फ दो पुस्तकें (भाषा और गणित) और वर्ग 3 से लेकर वर्ग 5 तक के लिए तीन पुस्तकें (भाषा, पर्यावरण अध्ययन और गणित) की अनुशंसा की है। एनसीईआरटी ने उनके पाठ्यक्रम वेब (इपाठशालाडॉटनिकडॉटइन) और मोबाइल साधनों के जरिए मुफ्त में उपलब्ध भी कराए हैं।
  2. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि वर्ग 2 तक बच्चों को स्कूल बैग न लाना पड़े। 12 सितंबर, 2016 को अपने नवीनतम सर्कुलर में सीबीएसई ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को सलाह दी है कि बच्चों के स्कूल बैग के भार को नियंत्रण में रखने के लिए वे हर संभव उपाय करें।
  3. केंद्रीय विद्यालय संगठन ने स्कूल बैग का भार करने के उद्देश्य से 25 केंद्रीय विद्यालयों (प्रत्येक क्षेत्र से 1 केंद्रीय विद्यालय) के वर्ग- 7 के सभी छात्रों में 5000 टैबलेट के वितरण के साथ एक प्रायौगिक परियोजना ई-प्रज्ञा को लागू किया है।

शिक्षा के संविधान की समवर्ती सूची में शामिल होने और ज्यादातर स्कूलों के राज्य सरकारों के अधीन होने की वजह से यह संबंधित राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकारों का काम है कि वो अपने मातहत स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए उचित कदम उठाए।
यह जानकारी मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री श्री उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दिया।

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