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तेज गर्मी और मौसम में नमी हैं बीमारी के मददगार

प्रचंड तापमान और अत्यधिक आर्द्रता से जापानी बुखार (जेई) और चमकी बुखार (एईएस) के मामले बढ़ जाते हैं। तापमान जितना अधिक होगा, बुखार का प्रसार उतनी ही तेजी से होगा। मानसून पूर्व और मानसून के बरसने से इसके खतरे कम होते जाएंगे। ये तथ्य सामने आए हैं एक शोध में। सीयूएसबी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रो. प्रधान पार्थ सारथी ने 2009 से 2014 के बीच तापमान और आर्द्रता का जेई और एइएस पर प्रभाव का अध्ययन किया। डॉ. प्रधान पार्थ सारथी इंडियन मेट्रोलॉजिकल सोसाइटी बिहार चैप्टर के अध्यक्ष भी हैं। वे जलवायु परिवर्तन को लेकर बिहार स्टेट एक्शन प्लान के स्टियरिंग कमेटी के सदस्य भी हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में जून में एईएस के केस ज्यादा देखे जाते हैं जबकि सितंबर और अक्टूबर में जापानी इंसेफलाइटिस के मामले बढ़ जाते हैं। यानी मानसून या मानसून से पहले एईएस विस्तार पाता है और मानसून के बाद जापानी इंसेफलाइटिस। अगर प्री मानसून या मानसून सामान्य रहा है तो दोनों बीमारियां काफी हद तक नियंत्रित रहती हैं।
ये जिले ज्यादा प्रभावित 
शोध के मुताबिक एईएस प्रभावित प्रमुख जिलों में गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण हैं।

मई 2014 में आये थे ज्यादा मामले
डा. पार्थ प्रधान सारथी बताते हैं कि सीयूएसबी के पर्यावरण विज्ञान विभाग में तापमान और आर्द्रता का मलेरिया, जेई और एईएस पर प्रभाव विषय पर एक छात्र ने पीएचडी भी की है। उन्होंने बताया कि  मई 2014 में सबसे ज्यादा तापमान रहा था। उस साल बिहार में एईएस के सर्वाधिक 1200 मामले सामने आए थे। इसके बाद उन्होंने पांच साल के तापमान और आर्द्रता के अध्ययन के आधार पर जेई और एईएस पर मेट्रोलॉजिकल अध्ययन शुरू किया। अध्ययन से जुड़ी रिपोर्ट द नेशनल मेडिकल जर्नल, इंडिया जर्नल और कम्यूनिकेबल डिजिज में वर्ष 2017 में प्रकाशित हो चुकी है।

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